
।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, मंगलवार 14 जुलाई 2026 ।।
—-:: उच्चतम न्यायालय नें आज मंगलवार 14 जुलाई को सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजुकेशन- सीबीएसई ” की तीसरी भाषा नीति पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। सीबीएसई तीसरी भाषा की मौजूदा नीति को इसी शिक्षा सत्र 2026-27, लागू भी कल दिया है। मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया सूर्यकांत, न्यायाधीश जाॅय माल्य बागची और न्यायाधीश वी. मोहना जी की बेंच अब इस मामले में कल बुधवार को आगे की सुनवाई करेगा। प्राप्त हुई जानकारी अनुसार याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा है कि नई नीति के अनुसार छात्रों को अब दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। छात्रों को वे भाषाएं छोड़नी होंगी जिन्हें वे कक्षा पांचवीं से लगातार अध्ययन करते आ रहें हैं । इसके अतिरिक्त इसमें अंग्रेजी को गैर मूल भाषा माना गया है। साथ ही मूल भाषाओं के लिए शिक्षकों और पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता पर भी चिंता जताई है। मालूम हो कि सीबीएसई ने 15 मई 2026 को एकेडमिक सेशन 2026-27, से तीसरी भाषा नीति लागू किए जाने का एक सर्कुलर जारी किया था। नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत देश के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में तीन भाषाएं पढ़ाई जायेंगी। इनमे तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं और एक अन्य भाषा शामिल होगी। इसमे पहली भाषा छात्र की मातृभाषा/ भारतीय भाषा/ क्षेत्रीय भाषा होगी। जहां संभव होगा वहां प्राथमिक शिक्षा में भी इसे शामिल किया जायेगा। दूसरी भाषा में- आमतौर पर हिंदी या राज्य की दूसरी भारतीय भाषा होगी। तीसरी भाषा में-: अंग्रेजी या कोई अन्य भारतीय/ विदेशी भाषा होगी। इसके अंतर्गत इस वर्ष कक्षा दसवीं में अध्ययन कर रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। कक्षा सातवीं, आठवीं, नवमीं के वे छात्र जिन्होनें पहले से दो विदेशी भाषाएं चुन रखीं हैं वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकतें हैं , हलांकि उन छात्रों को इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। इन छात्रों को कक्षा दसवीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। सीबीएसई की गाइडलाइन के अनुसार वर्तमान कक्षा दसवीं मे सत्र 2026-27,के लिए कोई भी बदलाव नहीं किया है। छात्र पहले के जैसे ही केवल दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड की परीक्षा दे सकतें हैं। कक्षा नवमीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होगी जीनमे कि कम से कम दो भारतीय भाषाएं भी जरुरी रहेगी, हलांकि जब वे छात्र अगले वर्ष कक्षा दसवीं में पहुंचेंगे तब वे तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देंगे।, तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही किया जा सकता है। वर्तमान कक्षा सातवीं, आठवीं के छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। वर्तमान कक्षा छठवीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा नीति पूरी तरह से लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छठवीं से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, और जब वे कक्षा दसवीं में पहुंचेंगे तब उन्हें बोर्ड की परीक्षा देनी होगी।.नई शिक्षा नीति 2020 को भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को अपनी मंजूरी प्रदान की थी। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने 2030 तक का अपना लक्ष्य रखा है।















